बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट 1 जमीन विवाद कब्जे और सीमांकन की पूरी जानकारी मामला — क्या हुआ?

बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट रायगढ़ शहर की एक पुरानी और सम्मानित धार्मिक संस्था है। इसके नाम पर शहर में लगभग 9 एकड़ से अधिक जमीन पंजीकृत है, जिसका उपयोग मंदिर समिति धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए करती है।
पिछले कुछ वर्षों से इस जमीन को लेकर एक गंभीर विवाद उभर रहा है। कई हिस्सों पर अवैध कब्जे की जानकारी मिली थी, जिससे ट्रस्ट की जमीन कम‑कम करके उनसे वंचित होती जा रही थी। हाल ही में प्रशासन की तरफ से जमीन का सीमांकन (डेमारकेशन) कार्य शुरू किया गया है ताकि नक्शे में पंजीकृत जमीन और वास्तविक जमीन की सीमाओं को जांचा जा सके।
जमीन विवाद की पृष्ठभूमि
बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट के पास जो जमीन है वह शहर के एक प्रमुख इलाके से होकर गुजरती है और इसका बाजार मूल्य बहुत अधिक है। यही कारण है कि इस जमीन पर दबंग लोग और रसूखदार धीरे‑धीरे कब्जा कर लेते हैं।
पहले भी प्रशासन ने एक जांच की थी जिसमें यह सामने आया कि कई कब्जाधारकों ने ट्रस्ट की जमीन पर अवैध कब्जा किया था। लेकिन उस समय केवल कब्जाधारकों की सूची ही बनाई गई थी। इसे देखकर मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इन अतिक्रमणकारियों ने समय के साथ कब्जे को और मजबूत किया, कई ने दुकानों, मकानों, गोदामों, हॉस्पिटल, पार्क और शोरूम तक बना लिया। यहाँ तक कि कुछ सरकारी भवन भी विवादित जमीन पर बनवा दिए गए।
ट्रस्ट के लिए यह गंभीर समस्या थी क्योंकि जमीन पर कब्जे की वजह से धार्मिक आयोजनों के अलावा उनके अधिकार भी खतरे में थे।

शहर में बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट समिति की बेशकीमती जमीन पर कब्जे के मामले में आखिरकार एक बार फिर जांच शुरू हो गई है। एसडीएम के निर्देश पर गठित पांच सदस्यीय टीम ने सोमवार से सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पूर्व में भी प्रशासनिक टीम ने जांच की थी जिसमें कब्जाधारियों की सूची तो बनाई गई थी परंतु किसका कितना कब्जा है इसकी कोई सुध नहीं ली थी
जिससे उस वक्त मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। वहीं अब पुन: ट्रस्ट की ओर से दिये गये आवेदन पर सीमांकन का कार्य प्रारंभ किया गया है। नगर की कुलदेवी बूढ़ी माई मंदिर के ट्रस्ट की करोड़ों रूपए की जमीन पर हुए बेजाकब्जा को खाली नहीं कराया जा सका है। पूर्व में ट्रस्ट की मांग पर जमीन की जांच कर अतिक्रमणकारियों की सूची तो बना ली थी, लेकिन किसका कितना कब्जा है इसकी जांच नहीं हो पाई थी।
ट्रस्ट की जमीन पर 45 से अधिक कब्जे पाए गए थे। वहीं अतिक्रमण की पुष्टि होने के बाद आगे की कार्रवाई अधर में लटक गई थी, जिसको देखते हुए बेजाकब्जाधारियों ने बचा हुआ निर्माण कार्य भी पुरा कर लिया। बताया जा रहा है कि बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट को मंदिर से लेकर कोतरा रोड रेलवे क्रासिंग तक मिली तकरीबन 9 एकड़ जमीन बेजा कब्जे का शिकार हो गई है।
ट्रस्ट की करोड़ों की जमीन शहर के पॉश क्षेत्र में होने की वजह से भूमि पर मकान, दुकान, गोदाम हॉस्पिटल, पार्क और शोरूम तक बन गए हैं। इतना ही नहीं पुलिस थाने का निर्माण भी हो गया है। इधर मामले को अधर में लटके देख ट्रस्ट की ओर से एक बार फिर ट्रस्ट की जमीन पर कब्जे की शिकायत जिला कलेक्टर से की थी।
मामले में ट्रस्ट ने नक्शा खसरा और जमीन सम्बंधी दस्तावेजों में छेड़छाड़ का आरोप भी लगाया था, जिसके बाद कलेक्टर ने जमीन का सीमांकन कर मामले की जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन 2 महीने से जांच प्रक्रिया अटकी हुई थी। वहीं अब एसडीएम ने मामले में पांच सदस्यीय टीम गठित कर जमीन का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार से ट्रस्ट की जमीन पर सीमांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो गइ है।
माना जा रहा है कि सीमांकन के दौरान कई बड़े रसूखदारों के बेजा कब्जे सामने आएंगे। वहीं नजूल विभाग, राजस्व निरीक्षक व पटवारी की पांच सदस्यीय प्रशासनिक टीम 7 दिनों तक ट्रस्ट की जमीन का सीमांकन करेगी। सीमांकन के बाद बेजा कब्जे की पुष्टि पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
ट्रस्ट और प्रशासन की शिकायत
ट्रस्ट ने जिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि:
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जमीन के नक्शे और खसरा दस्तावेजों में छेड़छाड़ हुई है।
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कुछ लोग खसरा और दस्तावेज बदलकर अपनी झूठी पंजीकरण करवा रहे हैं।
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इसके परिणामस्वरूप ट्रस्ट की निरीक्षित जमीन पर कब्जा बढ़ रहा है।
कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लिया और जमीन का सीमांकन कर प्रत्यक्ष सत्यापन करने का आदेश दिया।

क्या कहते हैं तहसीलदार
बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट की जमीन का प्रशासनिक टीम ने जांच शुरू कर दी है जो कि 7 दिनों तक ट्रस्ट की जमीन का सीमांकन करेगी। ट्रस्ट की ओर से बेजाकब्जा होने की शिकायत मिली थी। इस पर सीमांकन शुरू किया गया है। जांच पुरी होने के बाद ही वास्तविक जानकारी सामने आ पायेगी जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
– शिव कुमार डडसेना, तहसीलदार रायगढ़
जमीन सीमांकन (डेमारकेशन) क्या है?
सीमांकन वह प्रक्रिया है जिसमें जमीन के वास्तविक सीमाओं को उसके कानूनी दस्तावेजों, नक्शों और रिकॉर्ड्स से मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से तब आवश्यक होती है जब दस्तावेजों में संशोधन, छेड़छाड़ या गलत तरीके से सीमाएँ लिखी गई हों।
मुख्य उद्देश्य हैं:
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वास्तविक और कानूनी जमीन की तुलना करना
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अतिक्रमण के क्षेत्र की पहचान करना
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कब्जा किए गए हिस्सों का भौतिक सत्यापन करना
सीमांकन के दौरान राजस्व निरीक्षक, पटवारी, नजूल विभाग और अन्य अधिकारियों की टीम फील्ड में जाती है और जमीन की सीमाओं का मिलान करती है। Kelo Pravah
वर्तमान स्थिति — सीमांकन कैसे चल रहा है?
पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है जिसमें राजस्व निरीक्षक, पटवारी, नजूल विभाग प्रतिनिधि और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
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टीम ने निरीक्षण शुरू कर दिया है कि ट्रस्ट की जमीन कहाँ तक है और किस हिस्से पर अवैध कब्जा है।
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सीमांकन की प्रक्रिया लगभग एक सप्ताह तक चलेगी।
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टीम जमीन के प्रत्येक हिस्से का भौतिक सत्यापन कर रही है।
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कब्जाधारियों की पहचान की जा रही है।
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नक्शा और रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
सीमांकन के संभावित परिणाम
सीमांकन पूरा होने के बाद कई परिणाम सामने आ सकते हैं:
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अवैध कब्जे की पुष्टि होने पर कानूनी कार्रवाई शुरू होगी।
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दस्तावेजों में छेड़छाड़ साबित होने पर रिकॉर्ड को संशोधित किया जाएगा।
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वास्तविक सीमांकन अंकित होने से भविष्य में विवाद की संभावना कम होगी।
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ट्रस्ट की जमीन सुरक्षित होगी और धार्मिक गतिविधियाँ सामान्य रूप से चल सकेंगी।
कानूनी और प्रशासनिक पहलू
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राजस्व विभाग जमीन के रिकॉर्ड रखता है और सीमांकन कार्य करता है।
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कलेक्टर/तहसीलदार अतिक्रमण की शिकायतों का निपटारा करते हैं।
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अगर कोई पक्ष संतुष्ट नहीं है तो वह अदालत में अपील कर सकता है।
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बेदखली आदेश जारी होकर अवैध कब्जाधारियों को जमीन खाली करने के लिए कहा जाएगा।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
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जमीन का बाजार मूल्य बहुत अधिक है, कब्जा होने से आर्थिक हानि होती है।
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कब्जाधारियों में आम लोगों के अलावा व्यवसायी और रसूखदार भी हो सकते हैं, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ता है।
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धार्मिक स्थल की पवित्रता बनाए रखना समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।
भविष्य में संभावनाएँ
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कब्जाधारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही
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जमीन का ट्रस्ट को वापसी
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नक्शा और दस्तावेजों का सुधार
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अदालत में अपील होने की स्थिति
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भविष्य में जमीन का शांतिपूर्ण उपयोग
बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर कब्जे का विवाद गंभीर है। सीमांकन प्रक्रिया से यह पता चलेगा कि वास्तविक जमीन पर किसका अधिकार है और आगे की कार्रवाई क्या होगी। यह प्रक्रिया ट्रस्ट की संपत्ति के संरक्षण और धार्मिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
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